कोलकाता, 25 सितंबर 2026: गंभीर खर्राटे, नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना, दम घुटने जैसी स्थिति, नींद में अत्यधिक व्यवधान और दिन में अत्यधिक नींद आने की समस्या के कारण 26 वर्षीय मरीन इंजीनियर विकास गुप्ता (नाम बदला हुआ) में मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे, कोलकाता में गंभीर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) का निदान किया गया। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस की नली बार-बार अवरुद्ध हो जाती है।
पहले की गई पॉलीसोम्नोग्राफी (विस्तृत नींद जांच) में उनका एप्निया-हाइपोप्निया इंडेक्स (AHI) 40 से अधिक दर्ज किया गया था। इसमें प्रति घंटे सांस रुकने या बहुत उथली होने की घटनाओं की संख्या मापी जाती है। साथ ही, रक्त में ऑक्सीजन के स्तर में भी महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई थी। इसके बाद मरीज को मणिपाल हॉस्पिटल ब्रॉडवे के वरिष्ठ सलाहकार, ईएनटी एवं स्लीप एपनिया सर्जन डॉ. दीपंकर दत्ता के पास भेजा गया।
चूंकि मरीज मोटापाग्रस्त नहीं थे और लंबे समय तक सीपीएपी (नींद के दौरान लगातार वायु दबाव के जरिए सांस की नली को खुला रखने वाली मशीन) पर निर्भर नहीं रहना चाहते थे, इसलिए लक्षित बहु-स्तरीय सर्जरी को उपचार का उपयुक्त विकल्प चुना गया।
सर्जरी से पहले ड्रग-इंड्यूस्ड स्लीप एंडोस्कोपी (DISE) नामक उन्नत जांच की गई। यह जांच नींद के दौरान सांस की नली में अवरोध की वास्तविक जगह का पता लगाने में मदद करती है। जांच में नासोफैरिंक्स (नाक और गले के बीच का हिस्सा), तालु (मुंह के पीछे स्थित मुलायम ऊतक) और गले सहित कई स्तरों पर अवरोध पाया गया। मरीज की नाक के भीतर का सेप्टम भी टेढ़ा था, जबकि जीभ के कारण केवल मामूली अवरोध था।
इन निष्कर्षों के आधार पर चिकित्सकीय टीम ने सेप्टोप्लास्टी (नाक के टेढ़े सेप्टम को सीधा करना) और बार्ब्ड पैलेटोफैरिंजोप्लास्टी (विशेष बार्ब्ड टांकों की मदद से तालु और गले को नया आकार देकर तथा सहारा देकर वायु प्रवाह बेहतर करना) सहित लक्षित और न्यूनतम आक्रामक सर्जरी की। इस प्रक्रिया में एंडोस्कोपिक और माइक्रोस्कोपिक तकनीक के साथ कोब्लेशन तकनीक का उपयोग किया गया, जिसमें प्लाज्मा ऊर्जा की मदद से अपेक्षाकृत कम रक्तस्राव और कम दर्द के साथ उपचार किया जाता है।
अवरोध पैदा करने वाले विशिष्ट हिस्सों का उपचार करके सर्जरी से मरीज की सांस की नली में सुधार हुआ, जबकि तालु या यूवुला (मुंह के पीछे नीचे की ओर लटकने वाला छोटा ऊतक) को व्यापक रूप से हटाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में अच्छा सुधार हुआ और दो दिनों के भीतर उनके लक्षणों में उल्लेखनीय राहत मिली।
इस मामले पर डॉ. दीपंकर दत्ता ने कहा, “यह एक असामान्य मामला था, क्योंकि मरीज की उम्र केवल 26 वर्ष थी और वह मोटापाग्रस्त भी नहीं थे। मरीन इंजीनियर के रूप में उनके पेशे में अच्छी नींद और सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए स्थायी समाधान तलाशना जरूरी था। स्लीप एंडोस्कोपी ने हमें यह पता लगाने में मदद की कि नींद के दौरान उनकी सांस की नली ठीक किस स्थान पर बंद हो रही थी, विशेष रूप से तालु और ऑरोफैरिंक्स के स्तर पर। इन निष्कर्षों के आधार पर हमने सेप्टोप्लास्टी और बार्ब्ड पैलेटोफैरिंजोप्लास्टी सहित लक्षित बहु-स्तरीय सर्जरी की। मरीज अच्छी तरह स्वस्थ हो रहे हैं और हमें उम्मीद है कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद वह अपने पेशेवर दायित्वों को फिर से संभाल सकेंगे।”
अपने अनुभव साझा करते हुए विकास गुप्ता (नाम बदला हुआ) ने कहा, “लगातार खर्राटे, नींद में व्यवधान और दम घुटने की घटनाओं का असर मेरी दैनिक जिंदगी पर पड़ने लगा था और यह मेरे काम के लिए भी चिंता का विषय बन रहा था। मरीन इंजीनियर के रूप में मेरे लिए पर्याप्त नींद और सतर्क रहना बेहद जरूरी है। शुरुआत में मैं सर्जरी को लेकर चिंतित था, लेकिन डॉ. दत्ता और उनकी टीम ने समस्या और उपचार के बारे में स्पष्ट रूप से समझाया। प्रक्रिया के बाद मैं काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं। अब मेरी नींद भी काफी बेहतर है और मुझे उम्मीद है कि मैं जल्द ही अपनी ड्यूटी पर लौट सकूंगा।”
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में अच्छा सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अगले कुछ दिनों में वह धीरे-धीरे नरम आहार से सामान्य आहार की ओर लौटेंगे। मरीज ने बताया है कि प्रक्रिया के बाद उनकी नींद में काफी सुधार हुआ है। स्वस्थ होने की प्रक्रिया के तहत वह चिकित्सकीय अनुमति मिलने के बाद अपनी अगली समुद्री यात्रा पर मरीन इंजीनियर के रूप में पेशेवर दायित्वों को फिर से शुरू करने की योजना बना रहे हैं। कोलकाता लौटने पर उन्हें चिकित्सकीय टीम के नियमित संपर्क और फॉलो-अप में रहने की सलाह दी गई है।
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