रफिया शेरिन के लिए सही डोनर की तत्काल तलाश के चलते केरल में उनके पूर्व कॉलेज में रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने पंजीकरण कराया, जिससे भारत में संभावित ब्लड स्टेम सेल दाताओं की संख्या बढ़ाने की जरूरत सामने आई
23 अक्टूबर 2026: यूनाइटेड किंगडम के प्रेस्टन में रहने वाली 30 वर्षीय रफिया शेरिन गंभीर एप्लास्टिक एनीमिया नामक ब्लड संबंधी बीमारी से जूझ रही हैं। उन्हें तत्काल ब्लड स्टेम सेल प्रत्यारोपण की आवश्यकता है। अपने लिए सही डोनर की तलाश के दौरान रफिया ने अपनी इस लड़ाई को एक बड़े अभियान का रूप दे दिया है। वह अधिक से अधिक लोगों, खासकर दक्षिण एशियाई मूल के लोगों से, संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर के रूप में अपना पंजीकरण कराने की अपील कर रही हैं, ताकि जीवन बचाने वाले सही डोनर का इंतजार कर रहे मरीजों की मदद की जा सके।
रफिया की इस अपील को केरल में असाधारण समर्थन मिला है। उनके पूर्व कॉलेज, सुल्लमुस्सलम कॉलेज में केवल 2 दिनों के भीतर 11,000 से अधिक लोगों ने संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराया। यह अभियान DKMS फाउंडेशन इंडिया के इतिहास में व्यक्तिगत रूप से आयोजित ब्लड स्टेम सेल डोनर पंजीकरण का सबसे बड़ा अभियान है। यह पहल दर्शाती है कि रफिया के लिए सही डोनर की तलाश में समुदाय के लोगों ने कितने बड़े स्तर पर एकजुट होकर समर्थन दिया है।
एप्लास्टिक एनीमिया ब्लड संबंधी एक दुर्लभ और संभावित रूप से जानलेवा बीमारी है। इसमें अस्थि मज्जा (बोन मैरो) पर्याप्त मात्रा में लाल ब्लड कोशिकाएं, सफेद ब्लड कोशिकाएं और प्लेटलेट्स नहीं बना पाता। गंभीर मामलों में, ब्लड कोशिकाओं की संख्या कम होने से जानलेवा संक्रमण और गंभीर ब्लडस्राव हो सकता है। इसलिए समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है।
रफिया शेरिन ने कहा, “अगर मेरे लिए सही डोनर की तलाश से दक्षिण एशियाई मूल के मरीजों को होने वाली मुश्किलों के बारे में लोगों को पता चलता है, तो मुझे उम्मीद है कि इससे और भी लोग संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में अपना पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित होंगे। भले ही मुझे अपने लिए सही दाता न मिल पाए, लेकिन मैं किसी और के लिए यह मौका बनाने में मदद करना चाहती हूँ। मैं लगातार इस बीमारी से लड़ती रहूँगी और इसके बारे में लोगों को जागरूक करती रहूँगी, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को अपनी जान बचाने वाले डोनर मिलने की उम्मीद मिल सके।”
रफिया की अपील के समर्थन में, भारत में उनके परिवार और दोस्तों ने DKMS फाउंडेशन इंडिया के साथ मिलकर केरल में ब्लड स्टेम सेल डोनर पंजीकरण के लिए कई अभियान आयोजित किए। DKMS फाउंडेशन इंडिया एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो ब्लड कैंसर और थैलेसीमिया तथा एप्लास्टिक एनीमिया जैसी अन्य ब्लड संबंधी बीमारियों के खिलाफ लड़ाई के लिए काम करती है। इस अभियान को मंजेरी में अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जहाँ 1,500 से अधिक लोगों ने संभावित डोनर के रूप में पंजीकरण कराया। इसके बाद, सितंबर के अंत में तिरूर में एक अभियान आयोजित किया गया, जिसमें केवल एक दिन में 4,200 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया। तिरूर में आयोजित इस अभियान को स्नेहतीरम से जुड़े स्वयंसेवकों का समर्थन मिला। रफिया पहले इस संगठन के साथ काम कर चुकी हैं।
अक्टूबर की शुरुआत में यह अभियान सुल्लामुस्सलम कॉलेज पहुँचा, जहाँ पहले ही दिन 6,000 से अधिक लोगों ने संभावित ब्लड स्टेम सेल डोनर के रूप में अपना पंजीकरण कराया। लोगों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए इस अभियान को दूसरे दिन भी जारी रखा गया। अधिक लोगों का पंजीकरण करने के लिए अतिरिक्त पंजीकरण सामग्री की व्यवस्था की गई। 2 दिनों के इस अभियान के अंत तक पंजीकरण कराने वालों की संख्या 11,000 से अधिक हो गई।
200 से अधिक स्वयंसेवकों ने पंजीकरण प्रक्रिया और प्रतिभागियों को संभालने में DKMS फाउंडेशन इंडिया की टीमों की मदद की। लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने के लिए निःशुल्क बस सेवाओं की भी व्यवस्था की गई थी। रफिया के परिवार के सदस्य पूरे अभियान के दौरान मौजूद रहे और उन्होंने स्वयंसेवकों तथा संभावित डोनर से बातचीत की। इस पहल का समन्वय DKMS फाउंडेशन इंडिया की डोनर पंजीकरण, संचार, मरीजों से जुड़ाव और डेटा प्रबंधन टीमों ने किया।
ब्लड कैंसर और अन्य ब्लड संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए उपयुक्त ब्लड स्टेम सेल डोनर ढूँढ़ना आज भी एक बड़ी चुनौती है। डोनर और मरीज के बीच अनुकूलता काफी हद तक मानव ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) की विशेषताओं पर निर्भर करती है। ये विशेषताएँ आनुवंशिक रूप से अपने पूर्वजों से मिलती हैं और हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती हैं। आमतौर पर, एक जैसे पूर्वज-वंश से संबंध रखने वाले लोगों में उपयुक्त डोनर मिलने की संभावना अधिक होती है। इसलिए, दाता पंजीकरण सूची में दक्षिण एशियाई समुदाय सहित विभिन्न समुदायों के लोगों की अधिक भागीदारी जरूरी है, ताकि मरीजों को अपने लिए उपयुक्त डोनर मिलने की संभावना बढ़ सके।
DKMS फाउंडेशन इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष, पैट्रिक पॉल ने कहा, “DKMS फाउंडेशन इंडिया में हमारा मानना है कि संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराने वाला हर व्यक्ति, अनुकूल डोनर की तलाश कर रहे मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। केवल 2 दिनों में 11,000 से अधिक लोगों का पंजीकरण कराना सामूहिक प्रयासों की ताकत का शानदार उदाहरण है। हम रफिया के परिवार, स्वयंसेवकों और उनकी अपील पर आगे आकर सहयोग करने वाले सभी लोगों के आभारी हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हालाँकि, इसकी आवश्यकता केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है। ब्लड कैंसर और अन्य गंभीर ब्लड संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए उपयुक्त डोनर ढूँढ़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हमें उम्मीद है कि इस असाधारण प्रतिक्रिया से प्रेरित होकर पूरे भारत में और भी लोग संभावित स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराएँगे। इससे संभावित अनुकूल डोनर की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी और अधिक मरीजों को जीवन बचाने वाले प्रत्यारोपण का अवसर मिल सकेगा।”
18 से 55 वर्ष की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति https://www.dkms-india.org/get-involved/virtual-drives/rafiya से घर पर ही स्वैब किट मँगवाकर डोनर के रूप में पंजीकरण करा सकता है।
किट मिलने पर उसमें दिया गया सहमति फॉर्म भरें, अपने गाल के अंदरूनी हिस्से से स्वैब की मदद से टिश्यू सेल्स ले और स्वैब किट वापस भेज दें। इसके बाद, DKMS की प्रयोगशाला में आपके टिश्यू के प्रकार का विश्लेषण किया जाएगा। आपकी जानकारी को ब्लड स्टेम सेल डोनर की वैश्विक खोज प्रणाली में शामिल कर लिया जाएगा।
DKMS फाउंडेशन इंडिया के बारे में:
DKMS फाउंडेशन इंडिया एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो रक्त कैंसर तथा थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया जैसे अन्य रक्त विकारों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए समर्पित है। इस फाउंडेशन का उद्देश्य रक्त स्टेम सेल प्रत्यारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाकर और संभावित रक्त स्टेम सेल दाताओं का पंजीकरण करके भारत तथा विश्वभर के रोगियों की स्थिति में सुधार लाना है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया वेबसाइट पर जाएँ: www.dkms-India.org



