खाद्य सुरक्षा अवसंरचना और वैश्विक मानकों पर एआईएफपीए का राष्ट्रीय सम्मेलन

कोलकाता, 25 सितंबर 2026: ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन (AIFPA) ने खाद्य सुरक्षा अवसंरचना और वैश्विक मानकों पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 25 सितंबर को कोलकाता के आईटीसी रॉयल बंगाल में किया। सम्मेलन का विषय “फूड सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर 4.0: वैश्विक मानकों, परीक्षण क्षमता और व्यापार सुगमता में सामंजस्य” था।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, खाद्य सुरक्षा नियामकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निर्यातकों, खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं, प्रमाणन एवं निरीक्षण संस्थाओं, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन में भारत के खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र के सामने बदलते खाद्य सुरक्षा मानकों और वैश्विक नियामक आवश्यकताओं पर व्यापक चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के विस्तार के साथ खाद्य सुरक्षा नियमों, परीक्षण प्रक्रियाओं, उत्पादों की निगरानी एवं गुणवत्ता मानकों का अनुपालन अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी विचार-विमर्श किया गया कि भारत किस प्रकार अपनी खाद्य सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से बदल रही नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकता है।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण सम्मान समारोह रहा, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं उद्यानिकी तथा कृषि विभाग की राज्य मंत्री अमिया किस्कू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
चर्चाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और स्मार्ट अनुपालन प्रणालियों जैसी उभरती तकनीकों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से खाद्य उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी, जोखिम प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सम्मेलन में एक मजबूत, प्रौद्योगिकी-सक्षम और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खाद्य सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ व्यापार को सुगम बनाया जा सके और भारत के खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्यात क्षेत्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत किया जा सके।

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