सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने पर ICAI की कार्यशाला में पश्चिम बंगाल के 110 विधायकों ने लिया भाग

कोलकाता, 18 अगस्त, 2026: राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के अपने प्रयासों के अंतर्गत इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने 18 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित ICAI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्यों के लिए “सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में सुशासन को सुदृढ़ करना: एक विधायी परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
यह कार्यशाला विधायकों के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन, राजकोषीय शासन तथा विधायी निगरानी के संबंध में अपनी समझ को और गहन करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई। इसमें सार्वजनिक वित्त के प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित विचार-विमर्श किया गया, जिसमें राज्य के बजट को समझना एवं उसका विश्लेषण करना, सरकारी लेखांकन, राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा सतत राजकोषीय प्रबंधन शामिल रहे।
उद्घाटन सत्र में पश्चिम बंगाल विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री रथींद्र बोस ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ ICAI के अध्यक्ष CA. प्रसन्न कुमार डी.; ICAI के उपाध्यक्ष CA. मंगेश किनारे; सार्वजनिक एवं सरकारी वित्तीय प्रबंधन समिति (PGFMC) के अध्यक्ष CA. हंस राज चुग; PGFMC के उपाध्यक्ष CA. अर्पित कबरा; ICAI के CCM CA. रवि कुमार पटवा; ICAI के CCM CA. संजीब संघी तथा ICAI की ईस्टर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के अध्यक्ष CA. मयूर अग्रवाल भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर ICAI के अध्यक्ष CA. प्रसन्न कुमार डी. ने कहा, “ICAI सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने, वित्तीय जवाबदेही बढ़ाने तथा संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सार्वजनिक धन के प्रत्येक रुपये के उपयोग से अधिक पारदर्शिता, दक्षता और सार्वजनिक हित सुनिश्चित हो सके।”
ICAI के उपाध्यक्ष CA. मंगेश किनारे ने कहा, “ICAI सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने तथा सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और नागरिकों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने हेतु सूचित निर्णय-निर्माण में सहयोग प्रदान करने के लिए अपनी पेशेवर विशेषज्ञता का निरंतर उपयोग कर रहा है और ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा दे रहा है।”
पश्चिम बंगाल विधान सभा के लगभग 110 निर्वाचित सदस्यों ने कार्यशाला में भाग लिया। सत्रों को इस प्रकार तैयार किया गया था कि प्रतिभागियों की विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन, बजटीय प्रक्रियाओं तथा सार्वजनिक वित्त में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में विधायी निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका के संबंध में समझ को और सुदृढ़ किया जा सके।
कार्यशाला ने इस बात पर सार्थक संवाद एवं विचार-विमर्श का अवसर भी प्रदान किया कि विधायकों की सुदृढ़ वित्तीय समझ किस प्रकार सूचित विधायी निर्णय-निर्माण, सार्वजनिक व्यय की प्रभावी निगरानी तथा नागरिकों के लिए बेहतर शासन-परिणाम सुनिश्चित करने में सहायक हो सकती है।
कार्यशाला का समापन इस बात पर विशेष बल देते हुए हुआ कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए राजकोषीय विवेकशीलता तथा सुदृढ़ विधायी निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
ICAI के बारे में: ICAI एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के पेशे के विनियमन एवं विकास के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम, 1949 के अंतर्गत संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई है। संस्थान भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक पर्यवेक्षण में कार्य करता है। लगभग 12.32 लाख विद्यार्थियों और 4.67 लाख से अधिक सदस्यों के साथ ICAI वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा पेशेवर लेखा निकाय है। ICAI का भारत में 5 क्षेत्रीय परिषदों और 186 शाखाओं का व्यापक नेटवर्क है तथा वैश्विक स्तर पर 47 देशों के 85 शहरों में 55 विदेशी चैप्टर और 30 प्रतिनिधि कार्यालयों के माध्यम से इसकी उपस्थिति है।

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