हरिश पार्क में 1,200 वर्ग फुट का भव्य प्रकाशमय प्रवेश द्वार बना आकर्षण का केंद्र; 1.7 लाख रोशनियों, 80 से अधिक बंगाल के शिल्पकारों और 10 से अधिक विशेषज्ञ दलों ने मिलकर दिया कलात्मक परिकल्पना को साकार रूप।
कोलकाता, अक्टूबर 2026: किसी असाधारण ब्रांड अनुभव के पीछे रचनात्मक परिकल्पना के साथ-साथ उत्कृष्ट कार्यान्वयन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस दुर्गापूजा में आईटीसी सनफीस्ट मॉम्स मैजिक शाइन्स और एलाइव इंडिया ने कोलकाता के भवानीपुर स्थित हरिश पार्क में इसी सोच को साकार करते हुए एक भव्य प्रकाशमय दुर्गापूजा प्रवेश द्वार का निर्माण किया। बिस्कुट की विशिष्ट चमक और आकर्षक आकृतियों से प्रेरित इस कलात्मक संरचना ने बंगाल की शिल्पकला और उत्सवी कल्पनाशीलता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
आईटीसी के उत्सवी अभियान ‘ईइ पूजा, शाइन करो!’ के अंतर्गत निर्मित इस विशेष संरचना को ‘कोलकाता का सबसे चमकदार दुर्गापूजा पंडाल’ नाम दिया गया। 40 × 30 फुट आकार वाले इस प्रवेश द्वार का कुल क्षेत्रफल 1,200 वर्ग फुट था। इसे सजाने में 3,600 फुट क्षेत्र में फैली 1.7 लाख रोशनियों का उपयोग किया गया, जिसने पूरे परिसर को आकर्षक प्रकाश से आलोकित कर दिया।
परिकल्पना से निर्माण तक रचनात्मक साझेदारी
इस परियोजना की विशेषता एलाइव इंडिया की संस्थापक के प्रत्यक्ष नेतृत्व वाली अनुभव-आधारित विपणन पद्धति रही। संस्था के संस्थापक, पुरस्कारप्राप्त गायक, गीतकार और उद्यमी सुप्रतीक श्यामल घोष तथा ब्रांड समाधान प्रमुख उपासना पांडेय के नेतृत्व में दल ने रचनात्मक परिकल्पना से लेकर स्थल पर निर्माण और अंतिम प्रस्तुति तक की जिम्मेदारी संभाली।
वास्तुशिल्पीय रूपांकन, बिस्कुट से प्रेरित आकृतियों का निर्माण, रंगों का सटीक चयन, शिल्पकारों के साथ समन्वय, निर्माण कार्य, प्रकाश व्यवस्था और संपूर्ण कार्यान्वयन इस परियोजना के प्रमुख अंग रहे।
प्रसिद्ध कला निर्देशक एवं पुरस्कारप्राप्त कलाकार डॉ. शिउली घोष ने शाइन्स बिस्कुट से प्रेरित दृश्यात्मक संरचना की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने टीम निर्माण के कुशल बंगाली शिल्पकारों के साथ मिलकर बिस्कुट की आकृतियों, सतह की बनावट और विषयानुकूल प्रकाश सज्जा को अंतिम रूप दिया। लगातार वर्षा और प्रतिकूल मौसम के बावजूद इस कलात्मक कार्य को पूरा करने में 20 दिनों से अधिक समय तक गहन परिश्रम किया गया।
परियोजना की प्रगति, उद्घाटन और उत्सवी संचालन की निगरानी के लिए एलाइव इंडिया के वरिष्ठ नेतृत्व की टीम 20 सितंबर से 21 अक्टूबर तक कोलकाता में उपस्थित रही। इस विशाल आयोजन में बंगाल के 80 से अधिक कुशल शिल्पकारों तथा रचनात्मक, निर्माण और तकनीकी कार्यों से जुड़े 10 से अधिक विशेषज्ञ दलों ने भाग लिया। कठिन समयसीमा, बदलते मौसम और जटिल निर्माण संबंधी चुनौतियों के बीच सभी ने मिलकर इस परिकल्पना को वास्तविकता में बदला।
यह केवल एक विज्ञापनात्मक प्रवेश द्वार नहीं था, बल्कि एक उत्पाद की विशिष्ट पहचान को दुर्गापूजा की सांस्कृतिक परंपरा के साथ जोड़ने वाला कलात्मक प्रयास था।
ब्रांड की चमक से जनभागीदारी तक
इस साझेदारी ने यह प्रदर्शित किया कि उत्सवों में ब्रांड की उपस्थिति केवल प्रायोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे लोगों के लिए एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव में भी बदला जा सकता है।
प्रकाशमय संरचना के माध्यम से बिस्कुट की विशिष्ट चमक को प्रदर्शित किया गया, वहीं ‘शाइन्स स्पॉटलाइट प्रतियोगिता’ के माध्यम से आम लोगों को भी इस उत्सव से जोड़ा गया। इस प्रतियोगिता में दुर्गापूजा के दौरान अपने सबसे आकर्षक उत्सवी रूप को इंस्टाग्राम पर #ShinesSpotlight के साथ साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। चयनित प्रतिभागियों को कोलकाता के विभिन्न विज्ञापन पटों पर स्थान पाने का अवसर भी दिया गया।
आईटीसी फूड्स के बिस्कुट विभाग के विपणन उपाध्यक्ष एवं प्रमुख सूरज कथूरिया ने कहा कि ‘ईइ पूजा, शाइन करो!’ अभियान का उद्देश्य चमक की अवधारणा को उत्पाद से आगे ले जाकर यह दिखाना है कि दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता अपने विभिन्न रूपों में किस प्रकार चमकता है। उन्होंने कहा कि पंडालों की भव्यता और लोगों की अपनी विशिष्ट उत्सवी अभिव्यक्तियों को एक साथ जोड़कर यह पहल शहरवासियों के लिए एक विशेष अनुभव प्रस्तुत करती है। प्रतियोगिता के माध्यम से लोगों को अपनी उत्सवी चमक प्रदर्शित करने और नगर के विज्ञापन पटों पर स्थान पाने का अवसर भी मिलता है।
आईटीसी लिमिटेड के खाद्य विभाग में बिस्कुट एवं मिष्ठान्न व्यवसाय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कविता चतुर्वेदी ने कहा कि इस वर्ष सनफीस्ट मॉम्स मैजिक शाइन्स के माध्यम से कंपनी कुछ अलग और विशिष्ट करना चाहती थी, जिससे प्रत्येक क्षण को चमकदार बनाने की ब्रांड की सोच प्रतिबिंबित हो सके। उन्होंने एलाइव इंडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं के सहयोग से ‘सबसे चमकदार दुर्गापूजा’ की परिकल्पना साकार हुई और उपभोक्ताओं के लिए यह उत्सवी मौसम अधिक विशेष तथा स्मरणीय बन सका।
जहां कला और व्यापार का होता है संगम
एलाइव इंडिया के संस्थापक सुप्रतीक श्यामल घोष ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक कलाकार और संस्थापक के रूप में अपनी टीम के साथ इस परियोजना की रचनात्मक दिशा निर्धारित करना और उसके संपूर्ण कार्यान्वयन का नेतृत्व करना उनके लिए अत्यंत आनंददायक रहा।
उन्होंने बताया कि 20 सितंबर से 21 अक्टूबर तक उनकी टीम ने 80 से अधिक बंगाली शिल्पकारों और 10 से अधिक विशेषज्ञ दलों के साथ मिलकर बिस्कुट से प्रेरित वास्तुशिल्पीय संरचना, रंगों के सटीक चयन और विषयानुकूल प्रकाश व्यवस्था सहित प्रत्येक पहलू की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की। हरिश पार्क को रोशनी से जगमगाते देखना उनके लिए कलात्मक गर्व का क्षण था।
उन्होंने कहा, “हमारे लिए अनुभव-आधारित विपणन वह स्थान है, जहां कला और व्यापार का संगम होता है। शिल्पकला, सांस्कृतिक सहभागिता और आनंद के अविस्मरणीय क्षणों के माध्यम से किसी ब्रांड की कहानी को जीवंत करना ही हमारा उद्देश्य है।”
आईटीसी सनफीस्ट मॉम्स मैजिक शाइन्स के लिए इस अभियान ने उत्पाद की एक विशिष्ट विशेषता को यादगार सांस्कृतिक अनुभव में बदल दिया। वहीं एलाइव इंडिया के लिए यह परियोजना एक ऐसे समन्वित, कलाकार-नेतृत्व वाले रचनात्मक तंत्र की क्षमता का उदाहरण बनी, जो किसी ब्रांड की कल्पना को विचार से कार्यान्वयन, परिकल्पना से सृजन और रचनात्मक सोच से धरातलीय वास्तविकता तक पहुंचा सकता है।
क्योंकि एक चमकदार विचार की कल्पना करना एक उपलब्धि है, लेकिन उसे वास्तविकता में जीवंत कर देना अपने आप में एक अलग उपलब्धि है।









